The Vision of Śiva· 6.84 / 126

The Vision of Śiva6.84

6.84
शून्यस्य बोधाभावत्वात् कः केनात्र विबोध्यते । नहि शून्यस्य शून्येन बोधनं न च बाधनम् ॥८४॥
śūnyasya bodhābhāvatvāt kaḥ kenātra vibodhyate | nahi śūnyasya śūnyena bodhanaṃ na ca bādhanam
— शून्य के ; — बोध-रहित होने के कारण ; — कौन ; — किसके द्वारा ; — यहाँ ; — बोधित किया जाए ; — क्योंकि नहीं ; — शून्य का ; — शून्य द्वारा ; — बोधन ; — और न बाधन

शून्य के बोध-रहित होने के कारण, यहाँ कौन किसके द्वारा बोधित किया जाए? क्योंकि शून्य का शून्य द्वारा न बोधन (होता) है, और न बाधन (निरसन)।