The Vision of Śiva· 6.80 / 126

The Vision of Śiva6.80

6.80
निवृत्ते वाच्यसम्बन्धे प्रद्वेषो विधिगः परम् । अघटत्वं न सामान्यं किं न वा ह्यविशेषकम् ॥८०॥
nivṛtte vācyasambandhe pradveṣo vidhigaḥ param | aghaṭatvaṃ na sāmānyaṃ kiṃ na vā hyaviśeṣakam
— निवृत्त (हटा देने) पर ; — वाच्य (विधेय अर्थ) के सम्बन्ध के ; — प्रद्वेष (विरोध) ; — विधि (विधान) पर ही (जाता) ; — अन्ततः ; — अघटत्व ; — सामान्य नहीं ; — अथवा क्यों नहीं ; — निश्चय ही ; — अविशेषक (कुछ विशेष न बतलाने वाला)

वाच्य (विधेय अर्थ) के सम्बन्ध के निवृत्त (हटा देने) पर, (तुम्हारा विधि के प्रति) प्रद्वेष (विरोध) अन्ततः विधि (विधान/भाव) पर ही जा टिकता है; और क्या अघटत्व (न-घट-पन) सामान्य नहीं (है)? अथवा वह (भी) अविशेषक (कुछ विशेष न बतलाने वाला, अतः व्यर्थ) क्यों नहीं?