शून्यतां वा शून्यतायां व्यर्थता शब्दगोचरे ।
युगपद्वा घटाद्यर्था जगत्यानन्त्यमागताः ॥७९॥
śūnyatāṃ vā śūnyatāyāṃ vyarthatā śabdagocare |
yugapadvā ghaṭādyarthā jagatyānantyamāgatāḥ
अथवा (शब्द) शून्यता (का बोध कराता है)? यदि शब्द के गोचर (विषय) में (केवल) शून्यता हो, तो (वह) व्यर्थ है; अथवा (अन्य सबका अपोह करने के लिए) घट आदि समस्त अर्थ जगत् में युगपत् (एक साथ ज्ञात होने पड़ेंगे, जिससे) अनन्त्य (अनन्तता) प्राप्त होती है (— अपोह-मत की असम्भव माँग)।