The Vision of Śiva· 6.79 / 126

The Vision of Śiva6.79

6.79
शून्यतां वा शून्यतायां व्यर्थता शब्दगोचरे । युगपद्वा घटाद्यर्था जगत्यानन्त्यमागताः ॥७९॥
śūnyatāṃ vā śūnyatāyāṃ vyarthatā śabdagocare | yugapadvā ghaṭādyarthā jagatyānantyamāgatāḥ
— शून्यता ; — अथवा ; — शून्यता होने पर ; — व्यर्थता ; — शब्द के गोचर में ; — युगपत् ; — अथवा ; — घट आदि अर्थ ; — जगत् में ; — अनन्त्य (अनन्तता) ; — प्राप्त

अथवा (शब्द) शून्यता (का बोध कराता है)? यदि शब्द के गोचर (विषय) में (केवल) शून्यता हो, तो (वह) व्यर्थ है; अथवा (अन्य सबका अपोह करने के लिए) घट आदि समस्त अर्थ जगत् में युगपत् (एक साथ ज्ञात होने पड़ेंगे, जिससे) अनन्त्य (अनन्तता) प्राप्त होती है (— अपोह-मत की असम्भव माँग)।