सामान्याभावतस्तर्हि भवतो नानुमानता ।
सा भविष्यत्यपोहेन सोऽपि केनोपपद्यते ॥७७॥
sāmānyābhāvatastarhi bhavato nānumānatā |
sā bhaviṣyatyapohena so'pi kenopapadyate
तब, (वास्तविक) सामान्य के अभाव से, तुम्हारे (बौद्ध के) लिए अनुमानता (अनुमान) नहीं (बनती)। (यदि कहो कि) 'वह अपोह (व्यावृत्ति) से होगी' — तो वह (अपोह) भी किससे उपपन्न (होता है, क्योंकि अपोह जिसका अपोह है उसी की अपेक्षा रखता है)?