The Vision of Śiva· 6.77 / 126

The Vision of Śiva6.77

6.77
सामान्याभावतस्तर्हि भवतो नानुमानता । सा भविष्यत्यपोहेन सोऽपि केनोपपद्यते ॥७७॥
sāmānyābhāvatastarhi bhavato nānumānatā | sā bhaviṣyatyapohena so'pi kenopapadyate
— सामान्य के अभाव से ; — तब ; — तुम्हारे लिए ; — नहीं अनुमानता ; — वह होगी ; — अपोह (व्यावृत्ति) से ; — वह (अपोह) भी ; — किससे उपपन्न

तब, (वास्तविक) सामान्य के अभाव से, तुम्हारे (बौद्ध के) लिए अनुमानता (अनुमान) नहीं (बनती)। (यदि कहो कि) 'वह अपोह (व्यावृत्ति) से होगी' — तो वह (अपोह) भी किससे उपपन्न (होता है, क्योंकि अपोह जिसका अपोह है उसी की अपेक्षा रखता है)?