स्वभावत्वात्स्थितं तस्मादेकं तत्त्वं तथास्थितेः ।
भेदेन वाप्यभेदेन यदि वा नैकरूपता ॥७६॥
svabhāvatvātsthitaṃ tasmādekaṃ tattvaṃ tathāsthiteḥ |
bhedena vāpyabhedena yadi vā naikarūpatā
इसलिए, क्योंकि यह उनका स्वभाव है, एक तत्त्व स्थित (सिद्ध) है — उसकी वैसी स्थिति के कारण; (वह जगत् को धारण करता है) चाहे भेद से, अथवा अभेद से, अथवा (किसी) एक-रूपता से नहीं (अपितु शिव की स्वच्छन्द शक्ति से)।