The Vision of Śiva· 6.76 / 126

The Vision of Śiva6.76

6.76
स्वभावत्वात्स्थितं तस्मादेकं तत्त्वं तथास्थितेः । भेदेन वाप्यभेदेन यदि वा नैकरूपता ॥७६॥
svabhāvatvātsthitaṃ tasmādekaṃ tattvaṃ tathāsthiteḥ | bhedena vāpyabhedena yadi vā naikarūpatā
— स्वभाव होने के कारण ; — स्थित ; — इसलिए ; — एक तत्त्व ; — उसकी वैसी स्थिति के कारण ; — भेद से अथवा ; — अभेद से ; — अथवा ; — एक-रूपता नहीं

इसलिए, क्योंकि यह उनका स्वभाव है, एक तत्त्व स्थित (सिद्ध) है — उसकी वैसी स्थिति के कारण; (वह जगत् को धारण करता है) चाहे भेद से, अथवा अभेद से, अथवा (किसी) एक-रूपता से नहीं (अपितु शिव की स्वच्छन्द शक्ति से)।