The Vision of Śiva· 6.75 / 126

The Vision of Śiva6.75

6.75
नश्वरानश्वरत्वेऽपि स्वभावे प्रविकल्पनाः । अत्र नैव प्रवर्तन्ते हेतुसन्निधिनश्वराः ॥७५॥
naśvarānaśvaratve'pi svabhāve pravikalpanāḥ | atra naiva pravartante hetusannidhinaśvarāḥ
— नश्वर-अनश्वर होने में भी ; — स्वभाव में ; — विकल्प (विस्तार) ; — यहाँ ; — उठते ही नहीं ; — हेतु की सन्निधि में नश्वर

(किसी वस्तु के) स्वभाव में नश्वर-अनश्वर होने के विकल्प (विस्तार) यहाँ (हमारे मत में) उठते ही नहीं — (जो मानते हैं कि वस्तुएँ) हेतु (विनाशक कारण) की सन्निधि में (ही) नश्वर (होती) हैं।