The Vision of Śiva· 6.74 / 126

The Vision of Śiva6.74

6.74
कपालादिकजन्यत्वमभावस्तस्य संगता । सत्यस्य कारणापेक्षा घटादिजनने यथा ॥७४॥
kapālādikajanyatvamabhāvastasya saṃgatā | satyasya kāraṇāpekṣā ghaṭādijanane yathā
— कपाल (ठीकरे) आदि से जन्यत्व ; — अभाव ; — उसका ; — संगत ; — सत् की ; — कारण पर अपेक्षा ; — घट आदि की उत्पत्ति में ; — जैसे

(केवल हमारे मत में) अभाव (घट-नाश) का कपाल (ठीकरे) आदि से जन्यत्व (उत्पाद्यता) संगत होता है; (क्योंकि) सत् की कारण पर अपेक्षा (होती है), जैसे घट आदि की उत्पत्ति में (— अभाव भी स्थायी द्रव्य की एक भाव-अवस्था है)।