The Vision of Śiva· 6.66 / 126

The Vision of Śiva6.66

6.66
नाशं घटस्य जनयेत्तत्सम्बन्धितया स्थितम् । मृत्पिण्डस्य घटोत्पत्तौ सति तज्जननात्मके ॥६६॥
nāśaṃ ghaṭasya janayettatsambandhitayā sthitam | mṛtpiṇḍasya ghaṭotpattau sati tajjananātmake
— नाश को ; — घट के ; — उत्पन्न करे ; — उसके साथ सम्बद्ध होने के नाते ; — स्थित (बनता) ; — मृत्पिण्ड का ; — घट की उत्पत्ति में ; — होने पर ; — उस (घट को) उत्पन्न करने वाले स्वभाव वाला

(यदि कहो कि सामग्री) घट के नाश को उत्पन्न करती है — (तो यह) केवल उसके (नाश के) साथ सम्बद्ध होने के नाते (ही बनता) है; (जैसे) मृत्पिण्ड का घट की उत्पत्ति में (सामर्थ्य) तभी (होता है) जब (मिट्टी) उस (घट को) उत्पन्न करने वाले स्वभाव वाली हो।