नाशं घटस्य जनयेत्तत्सम्बन्धितया स्थितम् ।
मृत्पिण्डस्य घटोत्पत्तौ सति तज्जननात्मके ॥६६॥
nāśaṃ ghaṭasya janayettatsambandhitayā sthitam |
mṛtpiṇḍasya ghaṭotpattau sati tajjananātmake
(यदि कहो कि सामग्री) घट के नाश को उत्पन्न करती है — (तो यह) केवल उसके (नाश के) साथ सम्बद्ध होने के नाते (ही बनता) है; (जैसे) मृत्पिण्ड का घट की उत्पत्ति में (सामर्थ्य) तभी (होता है) जब (मिट्टी) उस (घट को) उत्पन्न करने वाले स्वभाव वाली हो।