The Vision of Śiva· 6.64 / 126

The Vision of Śiva6.64

6.64
विकल्पाः पुनरायान्ति नचाभावक्रियां प्रति । घट एव करणत्वे सामग्री जनिकेति ते ॥६४॥
vikalpāḥ punarāyānti nacābhāvakriyāṃ prati | ghaṭa eva karaṇatve sāmagrī janiketi te
— विकल्प ; — फिर आ जाते हैं ; — और नहीं ; — अभाव (असत्) की क्रिया के प्रति ; — घट ही ; — करण होने पर ; — सामग्री (समस्त कारण) ; — जनिका (अभाव की उत्पादक) ; — ऐसा तुम (कहोगे)

(वही) विकल्प फिर आ जाते हैं; और अभाव (असत्) की क्रिया के प्रति कोई (बुद्धिगम्य व्यापार) नहीं। (यदि कहो कि) घट ही (अपने नाश का) करण (साधन) है, तो सामग्री (समस्त कारण-कलाप) जनिका (अभाव की उत्पादक) है — ऐसा तुम (कहोगे)।