घटो नश्यत्यात्मनेति किंचित्कुर्वन् किमात्मना ।
नश्यत्यात्मन्यकुर्वन् वा तदेवं स्थित एव सः ॥६०॥
ghaṭo naśyatyātmaneti kiṃcitkurvan kimātmanā |
naśyatyātmanyakurvan vā tadevaṃ sthita eva saḥ
(तुम कहते हो) 'घट अपने आप नष्ट होता है।' (किन्तु) क्या वह अपने आत्मा में कुछ करते हुए नष्ट होता है, अथवा अपने आत्मा में कुछ न करते हुए? यदि (कुछ) न करते हुए (नष्ट हो), तो वह इस प्रकार (अविनष्ट) स्थित ही रहता है।