The Vision of Śiva· 6.60 / 126

The Vision of Śiva6.60

6.60
घटो नश्यत्यात्मनेति किंचित्कुर्वन् किमात्मना । नश्यत्यात्मन्यकुर्वन् वा तदेवं स्थित एव सः ॥६०॥
ghaṭo naśyatyātmaneti kiṃcitkurvan kimātmanā | naśyatyātmanyakurvan vā tadevaṃ sthita eva saḥ
— घट ; — नष्ट होता है ; — अपने आप ; — ऐसा (कहते हो) ; — कुछ करते हुए ; — अपने आत्मा में ; — नष्ट होता है ; — अपने आत्मा में कुछ न करते हुए ; — अथवा ; — तब इस प्रकार ; — वह स्थित ही

(तुम कहते हो) 'घट अपने आप नष्ट होता है।' (किन्तु) क्या वह अपने आत्मा में कुछ करते हुए नष्ट होता है, अथवा अपने आत्मा में कुछ न करते हुए? यदि (कुछ) न करते हुए (नष्ट हो), तो वह इस प्रकार (अविनष्ट) स्थित ही रहता है।