भावानां चित्रशक्तीनामभेदो हेमभेदवत् ।
वैलक्षण्यमपूर्वत्वं बाह्याभासक्रियोद्गमात् ॥५८॥
bhāvānāṃ citraśaktīnāmabhedo hemabhedavat |
vailakṣaṇyamapūrvatvaṃ bāhyābhāsakriyodgamāt
विचित्र शक्तियों वाले भावों का (फिर भी) अभेद है, जैसे (भिन्न आकार के) सोने (के आभूषणों) में (अभेद); और उनका वैलक्षण्य (विशिष्टता) और अपूर्वत्व (नवीनता केवल चित् के भीतर) बाह्य-आभास की क्रिया के उद्गम से (आती है)।