The Vision of Śiva· 6.58 / 126

The Vision of Śiva6.58

6.58
भावानां चित्रशक्तीनामभेदो हेमभेदवत् । वैलक्षण्यमपूर्वत्वं बाह्याभासक्रियोद्गमात् ॥५८॥
bhāvānāṃ citraśaktīnāmabhedo hemabhedavat | vailakṣaṇyamapūrvatvaṃ bāhyābhāsakriyodgamāt
— भावों का ; — विचित्र शक्तियों वाले ; — अभेद ; — सोने के भेद के समान ; — वैलक्षण्य (विशिष्टता) ; — अपूर्वत्व (नवीनता) ; — बाह्य-आभास की क्रिया के उद्गम से

विचित्र शक्तियों वाले भावों का (फिर भी) अभेद है, जैसे (भिन्न आकार के) सोने (के आभूषणों) में (अभेद); और उनका वैलक्षण्य (विशिष्टता) और अपूर्वत्व (नवीनता केवल चित् के भीतर) बाह्य-आभास की क्रिया के उद्गम से (आती है)।