The Vision of Śiva· 6.57 / 126

The Vision of Śiva6.57

6.57
नापि क्रमयौगपद्यविकल्पाः सहकारिणाम् । सन्निधौ कृतशक्तित्वादनेकेषां तथास्थितेः ॥५७॥
nāpi kramayaugapadyavikalpāḥ sahakāriṇām | sannidhau kṛtaśaktitvādanekeṣāṃ tathāsthiteḥ
— और न ही ; — क्रम-यौगपद्य के विकल्प ; — सहकारी (कारणों) के ; — सन्निधान (समीपता) में ; — शक्ति कृत होने के कारण ; — अनेक का ; — वैसे स्थित रहने के कारण

और न ही सहकारी (कारणों) के क्रम और यौगपद्य (एक-साथपन) के विकल्प (हम पर लागू होते हैं); क्योंकि सन्निधान (समीपता) में, (उनकी) शक्ति (पहले से) कृत होने के कारण, अनेक (सहकारी) वैसे ही (एक साथ) स्थित रहते हैं (— उनकी कार्यकारिता एक अधिष्ठायक पर आश्रित है)।