The Vision of Śiva· 6.56 / 126

The Vision of Śiva6.56

6.56
दृष्टान्तेऽपि हि सादृश्ये प्रत्यक्षेण क्षणग्रहः । दीपज्वालासमूहेषु कम्पनं न विनाशिता ॥५६॥
dṛṣṭānte'pi hi sādṛśye pratyakṣeṇa kṣaṇagrahaḥ | dīpajvālāsamūheṣu kampanaṃ na vināśitā
— दृष्टान्त में भी ; — सादृश्य के लिए ; — प्रत्यक्ष से ; — क्षणों का ग्रहण ; — दीप-ज्वालाओं के समूहों में ; — कम्पन (टिमटिमाहट) ; — विनाश नहीं

सादृश्य के लिए (दिए गए) दृष्टान्त (दीप-ज्वाला) में भी प्रत्यक्ष से (पृथक्) क्षणों का ग्रहण (नहीं होता); दीप-ज्वालाओं के समूहों में (केवल) कम्पन (टिमटिमाहट) है, (एक का) विनाश (और दूसरे की उत्पत्ति) नहीं।