The Vision of Śiva· 6.53 / 126

The Vision of Śiva6.53

6.53
भावस्य भावजनने युक्तत्वं न क्षणस्थितेः । न घटाद्घटसम्भूतिः समवायाद्यपेक्षया ॥५३॥
bhāvasya bhāvajanane yuktatvaṃ na kṣaṇasthiteḥ | na ghaṭādghaṭasambhūtiḥ samavāyādyapekṣayā
— भाव का ; — भाव को उत्पन्न करने में ; — युक्तता ; — नहीं ; — क्षण-स्थिति के कारण ; — नहीं ; — घट से ; — घट की उत्पत्ति ; — समवाय आदि की अपेक्षा से

(क्षणिकवादी के क्षण-मात्र-स्थिति के मत में) भाव का भाव को उत्पन्न करना युक्त नहीं; और (यथार्थवादी के मत में भी) समवाय आदि की अपेक्षा से घट से घट की उत्पत्ति नहीं (होती, जिसे क्षणिकवादी अस्वीकार करता है)।