The Vision of Śiva· 6.52 / 126

The Vision of Śiva6.52

6.52
कुर्वद्वा चार्थकार्यत्वं कुतो नश्वररूपता । कारणान्तरजन्यत्वे कारणान्तरसंगता ॥५२॥
kurvadvā cārthakāryatvaṃ kuto naśvararūpatā | kāraṇāntarajanyatve kāraṇāntarasaṃgatā
— करते हुए अथवा ; — और ; — अर्थ-कार्य (प्रभावी वस्तु) ; — कहाँ से ; — नश्वर-रूपता ; — अन्य कारण से जन्य होने पर ; — अन्य कारण से सम्बन्ध (आ पड़ता)

अथवा अर्थ-कार्य (प्रभावशाली वस्तु) करते हुए, नश्वर-रूपता कहाँ से (आए)? और यदि (वह नाश) किसी अन्य कारण से उत्पन्न हो, तो (फिर) अन्य कारण से सम्बन्ध (आ पड़ता है, और यों अनवस्था)।