The Vision of Śiva· 6.51 / 126

The Vision of Śiva6.51

6.51
नच नश्यदवस्थायां स्वाकार्यं तस्य युज्यते । कृत्वा कार्यं विनश्येच्चेत् क्षणान्तरमवस्थितिः ॥५१॥
naca naśyadavasthāyāṃ svākāryaṃ tasya yujyate | kṛtvā kāryaṃ vinaśyeccet kṣaṇāntaramavasthitiḥ
— और नहीं ; — नष्ट होती अवस्था में ; — अपना कार्य ; — उसका ; — सम्भव ; — करके ; — कार्य ; — नष्ट हो यदि ; — दूसरे क्षण में ; — अवस्थिति

और नष्ट होती हुई अवस्था में उसका अपना कार्य (करना) सम्भव नहीं; और यदि (वह) कार्य करके (फिर) नष्ट हो, तो (दूसरे) क्षण में अवस्थिति (टिकना आ पड़ता है — फिर क्षणिकता का नाश)।