The Vision of Śiva· 6.50 / 126

The Vision of Śiva6.50

6.50
अथ नश्वररूपत्वात्तद्रूपस्योद्भवः कथम् । उद्भवो नश्वरत्वं च द्वौ स्वभावौ कथं तथा ॥५०॥
atha naśvararūpatvāttadrūpasyodbhavaḥ katham | udbhavo naśvaratvaṃ ca dvau svabhāvau kathaṃ tathā
— अब यदि (कहो) ; — नश्वर-रूप होने के कारण ; — उस (नश्वर) रूप का ; — उद्भव ; — कैसे ; — उद्भव ; — और नश्वरत्व ; — दो (विरोधी) स्वभाव ; — वैसे कैसे

अब यदि (कहो कि वस्तु) नश्वर-रूप होने के कारण (नष्ट होती है) — तो उस (नश्वर) रूप का उद्भव (उत्पत्ति) ही कैसे? उद्भव और नश्वरत्व — ये दो (विरोधी) स्वभाव वैसे (एक में, एक काल में) कैसे (रहें)?