अथ नश्वररूपत्वात्तद्रूपस्योद्भवः कथम् ।
उद्भवो नश्वरत्वं च द्वौ स्वभावौ कथं तथा ॥५०॥
atha naśvararūpatvāttadrūpasyodbhavaḥ katham |
udbhavo naśvaratvaṃ ca dvau svabhāvau kathaṃ tathā
अब यदि (कहो कि वस्तु) नश्वर-रूप होने के कारण (नष्ट होती है) — तो उस (नश्वर) रूप का उद्भव (उत्पत्ति) ही कैसे? उद्भव और नश्वरत्व — ये दो (विरोधी) स्वभाव वैसे (एक में, एक काल में) कैसे (रहें)?