The Vision of Śiva· 6.54 / 126

The Vision of Śiva6.54

6.54
नष्टस्य समवायित्वमनष्टस्य घटस्य वा । नष्टस्य तदकर्तृत्वमनष्टस्य स्वरूपिता ॥५४॥
naṣṭasya samavāyitvamanaṣṭasya ghaṭasya vā | naṣṭasya tadakartṛtvamanaṣṭasya svarūpitā
— नष्ट का ; — समवायित्व ; — अनष्ट का ; — अथवा घट का ; — नष्ट का ; — उसमें अकर्तृत्व ; — अनष्ट का ; — अपने स्वरूप में स्थिति

समवायित्व (समवाय का सम्बन्ध) नष्ट (घट) का (है) या अनष्ट घट का? नष्ट का तो उसमें अकर्तृत्व (कुछ न कर सकना है); और अनष्ट का (तो) अपने स्वरूप में स्थिति (— अतः दोनों ही पक्षों में क्षणिकवादी निरुत्तर)।