नष्टस्य समवायित्वमनष्टस्य घटस्य वा ।
नष्टस्य तदकर्तृत्वमनष्टस्य स्वरूपिता ॥५४॥
naṣṭasya samavāyitvamanaṣṭasya ghaṭasya vā |
naṣṭasya tadakartṛtvamanaṣṭasya svarūpitā
समवायित्व (समवाय का सम्बन्ध) नष्ट (घट) का (है) या अनष्ट घट का? नष्ट का तो उसमें अकर्तृत्व (कुछ न कर सकना है); और अनष्ट का (तो) अपने स्वरूप में स्थिति (— अतः दोनों ही पक्षों में क्षणिकवादी निरुत्तर)।