अथ दीपप्रकाशत्वे न नित्यत्वं न कर्तृता ।
कर्तृता तत्र दीपादेः करणत्वं तदीक्षणे ॥४७॥
atha dīpaprakāśatve na nityatvaṃ na kartṛtā |
kartṛtā tatra dīpādeḥ karaṇatvaṃ tadīkṣaṇe
अब यदि (आक्षेप करो कि) दीप के प्रकाश में न नित्यत्व है न कर्तृत्व — (तो उत्तर:) वहाँ कर्तृत्व (देखने का, आत्मा का) है; दीप आदि का (उससे) देखने में (केवल) करणत्व (साधनता है)।