The Vision of Śiva· 6.47 / 126

The Vision of Śiva6.47

6.47
अथ दीपप्रकाशत्वे न नित्यत्वं न कर्तृता । कर्तृता तत्र दीपादेः करणत्वं तदीक्षणे ॥४७॥
atha dīpaprakāśatve na nityatvaṃ na kartṛtā | kartṛtā tatra dīpādeḥ karaṇatvaṃ tadīkṣaṇe
— अब यदि (आक्षेप) ; — दीप के प्रकाश में ; — न नित्यत्व ; — न कर्तृत्व ; — कर्तृत्व ; — वहाँ ; — दीप आदि का ; — करणत्व ; — उससे देखने में

अब यदि (आक्षेप करो कि) दीप के प्रकाश में न नित्यत्व है न कर्तृत्व — (तो उत्तर:) वहाँ कर्तृत्व (देखने का, आत्मा का) है; दीप आदि का (उससे) देखने में (केवल) करणत्व (साधनता है)।