The Vision of Śiva· 6.46 / 126

The Vision of Śiva6.46

6.46
प्रकाशमप्रकाशं वा ज्ञानं तस्य प्रकाशते । विद्यारूपादनाशित्वं नहि तत्त्वं विनश्वरम् ॥४६॥
prakāśamaprakāśaṃ vā jñānaṃ tasya prakāśate | vidyārūpādanāśitvaṃ nahi tattvaṃ vinaśvaram
— प्रकाश (प्रकाशमान) ; — अथवा अप्रकाश ; — ज्ञान ; — उसका ; — प्रकाशित होता है ; — विद्या-रूप होने के कारण ; — अनाशित्व ; — क्योंकि नहीं ; — तत्त्व ; — विनश्वर

(किसी) प्रकाश (प्रकाशमान) अथवा अप्रकाश (वस्तु को ग्रहण करते हुए भी), ज्ञान स्वयं प्रकाशित होता है; और विद्या-रूप होने के कारण (उसमें) अनाशित्व (अविनाशिता है) — क्योंकि (चेतन) तत्त्व विनश्वर नहीं।