प्रकाशमप्रकाशं वा ज्ञानं तस्य प्रकाशते ।
विद्यारूपादनाशित्वं नहि तत्त्वं विनश्वरम् ॥४६॥
prakāśamaprakāśaṃ vā jñānaṃ tasya prakāśate |
vidyārūpādanāśitvaṃ nahi tattvaṃ vinaśvaram
(किसी) प्रकाश (प्रकाशमान) अथवा अप्रकाश (वस्तु को ग्रहण करते हुए भी), ज्ञान स्वयं प्रकाशित होता है; और विद्या-रूप होने के कारण (उसमें) अनाशित्व (अविनाशिता है) — क्योंकि (चेतन) तत्त्व विनश्वर नहीं।