उत्पद्यमाने विज्ञाने नार्थनिष्पन्नता मता ।
नचार्थजातेऽवस्तुत्वं नावस्तुग्रहणादरः ॥४५॥
utpadyamāne vijñāne nārthaniṣpannatā matā |
nacārthajāte'vastutvaṃ nāvastugrahaṇādaraḥ
उत्पद्यमान (उत्पन्न होते हुए) विज्ञान में अर्थ की निष्पन्नता (सिद्धता) नहीं मानी जाती; और जब अर्थ उत्पन्न हो चुका, (तब उसमें) असत्यता नहीं — अतः (उसे) असत्-ग्रहण कहने का कोई आधार नहीं।