The Vision of Śiva· 6.45 / 126

The Vision of Śiva6.45

6.45
उत्पद्यमाने विज्ञाने नार्थनिष्पन्नता मता । नचार्थजातेऽवस्तुत्वं नावस्तुग्रहणादरः ॥४५॥
utpadyamāne vijñāne nārthaniṣpannatā matā | nacārthajāte'vastutvaṃ nāvastugrahaṇādaraḥ
— उत्पद्यमान विज्ञान में ; — नहीं ; — अर्थ की निष्पन्नता ; — मानी जाती ; — और नहीं ; — अर्थ उत्पन्न हो चुकने पर ; — असत्यता ; — नहीं ; — असत्-ग्रहण का आदर (आधार)

उत्पद्यमान (उत्पन्न होते हुए) विज्ञान में अर्थ की निष्पन्नता (सिद्धता) नहीं मानी जाती; और जब अर्थ उत्पन्न हो चुका, (तब उसमें) असत्यता नहीं — अतः (उसे) असत्-ग्रहण कहने का कोई आधार नहीं।