The Vision of Śiva· 6.44 / 126

The Vision of Śiva6.44

6.44
क्रमेण वा परिच्छेदे क्षणान्तरमवस्थितिः । दृष्ट्वा तां संपरिच्छेदे क्षणद्वैधमथोच्यते ॥४४॥
krameṇa vā paricchede kṣaṇāntaramavasthitiḥ | dṛṣṭvā tāṃ saṃparicchede kṣaṇadvaidhamathocyate
— क्रम से ; — अथवा ; — परिच्छेद (निश्चय) होने पर ; — दूसरे क्षण में ; — अवस्थिति ; — देखकर ; — उसे ; — पूर्ण परिच्छेद में ; — क्षण-द्वैध ; — तब ; — सूचित होता है

अथवा यदि परिच्छेद (निश्चय) क्रम से (हो), तो (वह) दूसरे क्षण में अवस्थिति (टिकना अपेक्षित); और उसे (विषय को) देखकर, पूर्ण परिच्छेद में क्षण-द्वैध (दो क्षणों का होना) इस प्रकार सूचित होता है (— जो क्षणिकता का नाशक है)।