क्रमेण वा परिच्छेदे क्षणान्तरमवस्थितिः ।
दृष्ट्वा तां संपरिच्छेदे क्षणद्वैधमथोच्यते ॥४४॥
krameṇa vā paricchede kṣaṇāntaramavasthitiḥ |
dṛṣṭvā tāṃ saṃparicchede kṣaṇadvaidhamathocyate
अथवा यदि परिच्छेद (निश्चय) क्रम से (हो), तो (वह) दूसरे क्षण में अवस्थिति (टिकना अपेक्षित); और उसे (विषय को) देखकर, पूर्ण परिच्छेद में क्षण-द्वैध (दो क्षणों का होना) इस प्रकार सूचित होता है (— जो क्षणिकता का नाशक है)।