The Vision of Śiva· 6.41 / 126

The Vision of Śiva6.41

6.41
नेत्रादिव्यापृतेः पूर्वं घटं पश्यामि तादृशी । जायते प्रथमैवेच्छा नामाजातस्य यादृशी ॥४१॥
netrādivyāpṛteḥ pūrvaṃ ghaṭaṃ paśyāmi tādṛśī | jāyate prathamaivecchā nāmājātasya yādṛśī
— नेत्र आदि के व्यापार से ; — पहले ; — 'घट को देखूँगा' ; — ऐसी ; — उत्पन्न होती है ; — प्रथम ही ; — इच्छा ; — निश्चय ही ; — (अभी अजात ज्ञान) की ; — जैसी

नेत्र आदि के व्यापार से पहले 'मैं घट को देखूँगा' — ऐसी जो प्रथम इच्छा उत्पन्न होती है, वह उस (अभी अजात ज्ञान) की होती है, जैसा कि (अभी) न उत्पन्न हुई (वस्तु) का (होता है — अतः इच्छा ज्ञान से पूर्ववर्ती और उसका आधार है)।