नच शुद्धस्य बाह्यार्थाभासता चेदविद्यया ।
वासनारूपया शुद्धे नाशुद्धा वासना भवेत् ॥४०॥
naca śuddhasya bāhyārthābhāsatā cedavidyayā |
vāsanārūpayā śuddhe nāśuddhā vāsanā bhavet
और शुद्ध (ज्ञान) की बाह्यार्थ-आभासता (नहीं बन सकती); क्योंकि यदि (कहो कि वह) वासना-रूप अविद्या से (होती है) — (तो) शुद्ध (ज्ञान) में अशुद्ध वासना हो ही नहीं सकती।