The Vision of Śiva· 6.40 / 126

The Vision of Śiva6.40

6.40
नच शुद्धस्य बाह्यार्थाभासता चेदविद्यया । वासनारूपया शुद्धे नाशुद्धा वासना भवेत् ॥४०॥
naca śuddhasya bāhyārthābhāsatā cedavidyayā | vāsanārūpayā śuddhe nāśuddhā vāsanā bhavet
— और नहीं ; — शुद्ध (ज्ञान) की ; — बाह्यार्थ-आभासता ; — यदि ; — अविद्या से ; — वासना-रूप ; — शुद्ध में ; — नहीं अशुद्ध ; — वासना ; — हो सके

और शुद्ध (ज्ञान) की बाह्यार्थ-आभासता (नहीं बन सकती); क्योंकि यदि (कहो कि वह) वासना-रूप अविद्या से (होती है) — (तो) शुद्ध (ज्ञान) में अशुद्ध वासना हो ही नहीं सकती।