The Vision of Śiva· 6.39 / 126

The Vision of Śiva6.39

6.39
भेदवानिति लक्ष्यत्वे दृष्टान्तोऽस्ति न तादृशः । ग्राह्यग्राहकसंवित्तेर्भेदवानिव लक्ष्यते ॥३९॥
bhedavāniti lakṣyatve dṛṣṭānto'sti na tādṛśaḥ | grāhyagrāhakasaṃvitterbhedavāniva lakṣyate
— भेदवान् (भेद-सहित) ; — ऐसा ; — लक्षित होने पर ; — दृष्टान्त ; — वैसा नहीं है ; — ग्राह्य-ग्राहक की संवित् का ; — भेदवान् मानो ; — लक्षित होता है

यदि (ज्ञान) 'भेदवान्' (भेद-सहित) के रूप में लक्षित हो, तो वैसा (कोई) दृष्टान्त (नहीं मिलता); (अपितु) ग्राह्य-ग्राहक की एक संवित् ही मानो भेदवान् लक्षित होती है (जबकि वस्तुतः अभिन्न है)।