विज्ञानवादिनां ज्ञानं सत्यं प्रत्येत्यसत्यताम् ।
बहिः कथं नह्यसत्यं सत्याद्भवितुमर्हति ॥३३॥
vijñānavādināṃ jñānaṃ satyaṃ pratyetyasatyatām |
bahiḥ kathaṃ nahyasatyaṃ satyādbhavitumarhati
विज्ञानवादियों के (मत में) ज्ञान सत्य है, (किन्तु) वह असत्यता (बाह्य अर्थ को असत्य रूप में) ग्रहण करता है — बाहर कैसे (ग्रहण करे)? क्योंकि असत् सत् से उत्पन्न होने योग्य नहीं।