स्वर्गमुक्तिवादिनां तु बन्धमोक्षौ व्यवस्थितौ ।
ये बाह्यवादिनो बौद्धास्ते भेदं समुपाश्रिताः ॥३२॥
svargamuktivādināṃ tu bandhamokṣau vyavasthitau |
ye bāhyavādino bauddhāste bhedaṃ samupāśritāḥ
किन्तु जो स्वर्ग को ही मुक्ति मानने वाले हैं, उनके (मत में) बन्ध और मोक्ष (मात्र पृथक्) व्यवस्थित (स्थितियाँ हैं)। और जो बाह्यवादी बौद्ध हैं, वे भेद (विषय और ज्ञान के भेद) का आश्रय लिए हुए हैं।