The Vision of Śiva· 6.32 / 126

The Vision of Śiva6.32

6.32
स्वर्गमुक्तिवादिनां तु बन्धमोक्षौ व्यवस्थितौ । ये बाह्यवादिनो बौद्धास्ते भेदं समुपाश्रिताः ॥३२॥
svargamuktivādināṃ tu bandhamokṣau vyavasthitau | ye bāhyavādino bauddhāste bhedaṃ samupāśritāḥ
— किन्तु स्वर्ग-मुक्ति-वादियों के ; — बन्ध और मोक्ष ; — व्यवस्थित ; — जो बाह्यवादी ; — बौद्ध ; — वे ; — भेद का ; — आश्रय लिए हुए

किन्तु जो स्वर्ग को ही मुक्ति मानने वाले हैं, उनके (मत में) बन्ध और मोक्ष (मात्र पृथक्) व्यवस्थित (स्थितियाँ हैं)। और जो बाह्यवादी बौद्ध हैं, वे भेद (विषय और ज्ञान के भेद) का आश्रय लिए हुए हैं।