वदन्ति ते हि सकलमेतन्नारदसंग्रहात् ।
कालकारणिकानां तु नामता जडताथवा ॥३०॥
vadanti te hi sakalametannāradasaṃgrahāt |
kālakāraṇikānāṃ tu nāmatā jaḍatāthavā
वे निश्चय ही यह सब नारद-संग्रह के आधार पर कहते हैं। किन्तु जो काल को कारण मानते हैं, उनके (प्रथम तत्त्व की) (केवल) नामता (मात्र नाम), अथवा जड़ता (ही है)।