The Vision of Śiva· 6.30 / 126

The Vision of Śiva6.30

6.30
वदन्ति ते हि सकलमेतन्नारदसंग्रहात् । कालकारणिकानां तु नामता जडताथवा ॥३०॥
vadanti te hi sakalametannāradasaṃgrahāt | kālakāraṇikānāṃ tu nāmatā jaḍatāthavā
— कहते हैं ; — वे निश्चय ; — यह सब ; — नारद-संग्रह के आधार पर ; — किन्तु काल-कारणवादियों के (लिए) ; — नामता (मात्र नाम) ; — जड़ता ; — अथवा

वे निश्चय ही यह सब नारद-संग्रह के आधार पर कहते हैं। किन्तु जो काल को कारण मानते हैं, उनके (प्रथम तत्त्व की) (केवल) नामता (मात्र नाम), अथवा जड़ता (ही है)।