The Vision of Śiva· 6.29 / 126

The Vision of Śiva6.29

6.29
प्रकृत्यादीश्वरत्वेन सर्वदैव तदात्मता । संवित्तिशून्यब्रह्मत्ववादिनां जडतैव सा ॥२९॥
prakṛtyādīśvaratvena sarvadaiva tadātmatā | saṃvittiśūnyabrahmatvavādināṃ jaḍataiva sā
— प्रकृति आदि पर ईश्वरत्व के कारण ; — सर्वदा ही ; — तदात्मता ; — संवित्ति-शून्य ब्रह्म-वादियों के (लिए) ; — जड़ता ही ; — वह (ब्रह्म)

(हमारे मत में, दूसरी ओर,) प्रकृति आदि पर (शिव के) ईश्वरत्व के कारण सर्वदा ही तदात्मता (उसी का आत्म-भाव) है। किन्तु जो संवित्ति-शून्य (चैतन्य-रहित) ब्रह्म का वाद करते हैं, उनके लिए वह (ब्रह्म) जड़ता ही है।