पृथक्त्वमीश्वरस्यास्ति सर्वात्मभ्यः पृथक्कुतः ।
न्यायवैशेषिकाणां तु बन्धमोक्षौ पृथक्स्थिती ॥२८॥
pṛthaktvamīśvarasyāsti sarvātmabhyaḥ pṛthakkutaḥ |
nyāyavaiśeṣikāṇāṃ tu bandhamokṣau pṛthaksthitī
(उनके मत में) ईश्वर का समस्त आत्माओं से पृथक्त्व है — किन्तु ऐसा पृथक्त्व कहाँ से (बने)? और नैयायिक-वैशेषिकों के (मत में) बन्ध और मोक्ष पृथक् स्थितियाँ हैं।