The Vision of Śiva· 6.27 / 126

The Vision of Śiva6.27

6.27
ये सांख्या आत्मस्वातन्त्र्यवादिनो येऽप्यनीश्वराः । तत्राप्यस्त्यविवेकाख्यो मलो बन्धविमोक्षता ॥२७॥
ye sāṃkhyā ātmasvātantryavādino ye'pyanīśvarāḥ | tatrāpyastyavivekākhyo malo bandhavimokṣatā
— जो सांख्य ; — आत्मा की स्वतन्त्रता के वादी ; — और जो अनीश्वर ; — वहाँ भी ; — है ; — अविवेक नामक ; — मल (अशुद्धि) ; — बन्ध-मोक्षता

जो सांख्य आत्मा की स्वतन्त्रता के वादी हैं, और जो अनीश्वर (ईश्वर को न मानने वाले) हैं — वहाँ भी अविवेक नामक मल (अशुद्धि) है, (और उस पर) बन्ध-मोक्षता (की व्यवस्था है)।