तथा जघन्यरूपायाः सम्बन्धोऽस्य विरुध्यते ।
तथा जगत्समुत्पत्तौ निमित्तान्तरकल्पना ॥२२॥
tathā jaghanyarūpāyāḥ sambandho'sya virudhyate |
tathā jagatsamutpattau nimittāntarakalpanā
इसी प्रकार जघन्य-रूप (निकृष्ट अविद्या) का उसके (ब्रह्म के) साथ सम्बन्ध विरुद्ध है; और इसी प्रकार जगत् की उत्पत्ति में (एक) और निमित्त (कारण) की कल्पना (आ पड़ती है, और यों अनवस्था)।