The Vision of Śiva· 6.22 / 126

The Vision of Śiva6.22

6.22
तथा जघन्यरूपायाः सम्बन्धोऽस्य विरुध्यते । तथा जगत्समुत्पत्तौ निमित्तान्तरकल्पना ॥२२॥
tathā jaghanyarūpāyāḥ sambandho'sya virudhyate | tathā jagatsamutpattau nimittāntarakalpanā
— इसी प्रकार ; — जघन्य-रूप (निकृष्ट अविद्या) का ; — सम्बन्ध ; — उसका (ब्रह्म का) ; — विरुद्ध ; — इसी प्रकार ; — जगत् की उत्पत्ति में ; — और निमित्त (कारण) की कल्पना

इसी प्रकार जघन्य-रूप (निकृष्ट अविद्या) का उसके (ब्रह्म के) साथ सम्बन्ध विरुद्ध है; और इसी प्रकार जगत् की उत्पत्ति में (एक) और निमित्त (कारण) की कल्पना (आ पड़ती है, और यों अनवस्था)।