अविद्या वस्तुरूपा चेद्विद्यया साकमेकता ।
अवस्तु वा नह्यसत्यं सत्यरूपस्य साधनम् ॥२१॥
avidyā vasturūpā cedvidyayā sākamekatā |
avastu vā nahyasatyaṃ satyarūpasya sādhanam
यदि अविद्या वस्तु-रूप (सत्) हो, तो विद्या के साथ (उसकी) एकता (हो जाएगी, भेद ही न रहेगा); अथवा (वह) अवस्तु (असत्) हो — (तो) असत्य (वस्तु) सत्य-रूप (कार्य) का साधन नहीं हो सकती।