गीतासु विश्वरूपत्वमत एव प्रदर्शितम् ।
द्वयोरप्यनयोर्युक्तिः पक्षयोर्नोपपद्यते ॥२०॥
gītāsu viśvarūpatvamata eva pradarśitam |
dvayorapyanayoryuktiḥ pakṣayornopapadyate
और इसी कारण गीताओं में (भगवान् का) विश्वरूपत्व प्रदर्शित है। (किन्तु) इन दोनों पक्षों की युक्ति उपपन्न नहीं होती (— जैसा आगे दिखाया जाता है)।