The Vision of Śiva· 6.20 / 126

The Vision of Śiva6.20

6.20
गीतासु विश्वरूपत्वमत एव प्रदर्शितम् । द्वयोरप्यनयोर्युक्तिः पक्षयोर्नोपपद्यते ॥२०॥
gītāsu viśvarūpatvamata eva pradarśitam | dvayorapyanayoryuktiḥ pakṣayornopapadyate
— गीताओं में ; — विश्वरूपत्व ; — इसी कारण ; — प्रदर्शित ; — दोनों की भी ; — इनकी ; — युक्ति ; — पक्षों की ; — उपपन्न नहीं होती

और इसी कारण गीताओं में (भगवान् का) विश्वरूपत्व प्रदर्शित है। (किन्तु) इन दोनों पक्षों की युक्ति उपपन्न नहीं होती (— जैसा आगे दिखाया जाता है)।