The Vision of Śiva· 6.23 / 126

The Vision of Śiva6.23

6.23
अविद्यादेर्निमित्तत्वे वेदान्तैः साम्यमागतम् । पक्षे द्वितीये ताद्रूप्यं जडत्वादिह तस्य कः ॥२३॥
avidyādernimittatve vedāntaiḥ sāmyamāgatam | pakṣe dvitīye tādrūpyaṃ jaḍatvādiha tasya kaḥ
— अविद्या आदि के ; — निमित्त (कारण) होने पर ; — वेदान्तियों के साथ ; — समानता ; — आ गई ; — दूसरे पक्ष में ; — तद्रूप्य (एकता) ; — जड़ होने के कारण ; — यहाँ ; — उसका ; — कौन (करेगा)

यदि अविद्या आदि निमित्त (कारण) हो, तो (पूर्वोक्त) वेदान्तियों के साथ समानता आ गई; और दूसरे पक्ष में (ब्रह्म-अविद्या के) तद्रूप्य (एकता) मानने पर, अविद्या के जड़ होने के कारण यहाँ उसका (विद्या-संयोग) कौन (करेगा)?