अविद्यादेर्निमित्तत्वे वेदान्तैः साम्यमागतम् ।
पक्षे द्वितीये ताद्रूप्यं जडत्वादिह तस्य कः ॥२३॥
avidyādernimittatve vedāntaiḥ sāmyamāgatam |
pakṣe dvitīye tādrūpyaṃ jaḍatvādiha tasya kaḥ
यदि अविद्या आदि निमित्त (कारण) हो, तो (पूर्वोक्त) वेदान्तियों के साथ समानता आ गई; और दूसरे पक्ष में (ब्रह्म-अविद्या के) तद्रूप्य (एकता) मानने पर, अविद्या के जड़ होने के कारण यहाँ उसका (विद्या-संयोग) कौन (करेगा)?