The Vision of Śiva· 6.2 / 126

The Vision of Śiva6.2

6.2
एवं तथा शक्तिमतः शक्तस्य समवस्थिता । जगद्विचित्रता शैवे न पुनर्दर्शनान्तरे ॥२॥
evaṃ tathā śaktimataḥ śaktasya samavasthitā | jagadvicitratā śaive na punardarśanāntare
— इसी प्रकार ; — शक्तिमान् की ; — शक्त (समर्थ) की ; — भली-भाँति स्थित ; — जगत्-विचित्रता ; — शैव (मत) में ; — किन्तु नहीं ; — अन्य दर्शन में

इसी प्रकार, शक्त (समर्थ) शक्तिमान् की जगत्-विचित्रता शैव (मत) में भली-भाँति स्थित है, किन्तु अन्य किसी दर्शन में नहीं (— जैसा आगे की समीक्षा से स्पष्ट होगा)।