The Vision of Śiva· 6.123 / 126

The Vision of Śiva6.123

6.123
वैलक्षण्यं गवादीनां न तथेहास्ति किंचन । मुक्तेषु निर्विशेषत्वात् केनैक्यं तत्र वार्यते ॥१२३॥
vailakṣaṇyaṃ gavādīnāṃ na tathehāsti kiṃcana | mukteṣu nirviśeṣatvāt kenaikyaṃ tatra vāryate
— वैलक्षण्य (विशिष्ट भेद) ; — गाय आदि का ; — वैसा नहीं ; — यहाँ ; — कुछ भी है ; — मुक्तों में ; — निर्विशेषता के कारण ; — किसके द्वारा ; — ऐक्य ; — वहाँ ; — निवारित किया जाता है?

गाय आदि का जैसा वैलक्षण्य (विशिष्ट भेद) है, वैसा यहाँ कुछ भी नहीं है; मुक्तों में, निर्विशेषता (समस्त विशेष के अभाव) के कारण, वहाँ ऐक्य (एकता) किसके द्वारा निवारित किया जाए?