स्थितेऽपि वार नानात्वे कैवल्ये न विशेषता ।
एकोऽपि तत्र वैरूपो बहवोऽप्येकरूपिणः ॥११९॥
sthite'pi vāra nānātve kaivalye na viśeṣatā |
eko'pi tatra vairūpo bahavo'pyekarūpiṇaḥ
अथवा नानात्व (बहुत्व) के सिद्ध होने पर भी, कैवल्य (मोक्ष) में (वास्तविक) विशेषता (भेद) नहीं है; वहाँ एक भी (मानो) वैरूप (अनेक रूप वाला) है, और अनेक भी (वस्तुतः) एकरूप ही हैं।