The Vision of Śiva· 6.119 / 126

The Vision of Śiva6.119

6.119
स्थितेऽपि वार नानात्वे कैवल्ये न विशेषता । एकोऽपि तत्र वैरूपो बहवोऽप्येकरूपिणः ॥११९॥
sthite'pi vāra nānātve kaivalye na viśeṣatā | eko'pi tatra vairūpo bahavo'pyekarūpiṇaḥ
— सिद्ध होने पर भी ; — अथवा ; — नानात्व के ; — कैवल्य में ; — विशेषता नहीं ; — एक भी ; — वहाँ ; — वैरूप (अनेकरूप) ; — अनेक भी ; — एकरूप

अथवा नानात्व (बहुत्व) के सिद्ध होने पर भी, कैवल्य (मोक्ष) में (वास्तविक) विशेषता (भेद) नहीं है; वहाँ एक भी (मानो) वैरूप (अनेक रूप वाला) है, और अनेक भी (वस्तुतः) एकरूप ही हैं।