The Vision of Śiva· 6.120 / 126

The Vision of Śiva6.120

6.120
सर्वज्ञत्वादिरूपेण सर्व एव शिवाः स्थिताः । व्यापकाश्च तथा सर्वे सर्व एवात्मसंविदः ॥१२०॥
sarvajñatvādirūpeṇa sarva eva śivāḥ sthitāḥ | vyāpakāśca tathā sarve sarva evātmasaṃvidaḥ
— सर्वज्ञत्व आदि रूप से ; — सभी समानरूप से ; — शिव ; — अवस्थित ; — और व्यापक ; — उसी प्रकार सभी ; — सभी समानरूप से ; — आत्म-संवित्

सर्वज्ञत्व आदि रूप से सभी समानरूप से शिव-स्वरूप अवस्थित हैं; और उसी प्रकार सभी व्यापक हैं, सभी समानरूप से आत्म-संवित् (आत्म-अनुभूति वाले) हैं।