सर्वज्ञत्वादिरूपेण सर्व एव शिवाः स्थिताः ।
व्यापकाश्च तथा सर्वे सर्व एवात्मसंविदः ॥१२०॥
sarvajñatvādirūpeṇa sarva eva śivāḥ sthitāḥ |
vyāpakāśca tathā sarve sarva evātmasaṃvidaḥ
सर्वज्ञत्व आदि रूप से सभी समानरूप से शिव-स्वरूप अवस्थित हैं; और उसी प्रकार सभी व्यापक हैं, सभी समानरूप से आत्म-संवित् (आत्म-अनुभूति वाले) हैं।