एतस्यामप्यवस्थायां नामभेदो न विद्यते ।
हतं केनैकरूपत्वं सामान्येऽपि यववस्थिते ॥१२१॥
etasyāmapyavasthāyāṃ nāmabhedo na vidyate |
hataṃ kenaikarūpatvaṃ sāmānye'pi yavavasthite
इस (मुक्त) अवस्था में भी नाम-भेद नहीं पाया जाता; (तो) एकरूपत्व किसके द्वारा हत (निरस्त) किया जाए, जब सबका सामान्य (समान स्वभाव) भी व्यवस्थित है (— भेद तो मात्र नाम हैं)?