The Vision of Śiva· 6.118 / 126

The Vision of Śiva6.118

6.118
एकस्यैवात्मनो यद्वदङ्गभेदो विचित्रता । युगपद्बन्धपीडादिस्तद्वन्नानाशरीरता ॥११८॥
ekasyaivātmano yadvadaṅgabhedo vicitratā | yugapadbandhapīḍādistadvannānāśarīratā
— एक ही ; — आत्मा का ; — जैसे ; — अंग-भेद ; — विचित्रता ; — एक साथ ; — बन्ध, पीड़ा आदि ; — उसी प्रकार ; — नानाशरीरता

जैसे एक ही आत्मा के अंग-भेद (अवयव-भेद), विचित्रता (विविधता), तथा एक साथ (भिन्न अंगों में) बन्ध, पीड़ा आदि होते हैं — उसी प्रकार नानाशरीरता (अनेक शरीरों की बहुलता एक ही शिव में अन्तर्भूत है)।