The Vision of Śiva· 6.114 / 126

The Vision of Śiva6.114

6.114
तथा तस्य यथान्येषां यथान्येषां तथास्य तु । तस्मादनेकात्मतया दोषा आयान्ति तादृशाः ॥११४॥
tathā tasya yathānyeṣāṃ yathānyeṣāṃ tathāsya tu | tasmādanekātmatayā doṣā āyānti tādṛśāḥ
— वैसा उसका ; — जैसा अन्यों का ; — जैसा अन्यों का ; — वैसा ही उसका ; — इसलिए ; — अनेकात्मता के द्वारा ; — दोष ; — आ पड़ते हैं ; — वैसे (दोष)

(बहुत्व-मत में) जैसा उसका (स्वरूप) है वैसा ही अन्यों का, और जैसा अन्यों का वैसा ही उसका; इसलिए अनेकात्मता (बहु-आत्म-कल्पना) के द्वारा वैसे (पूर्वोक्त) दोष आ पड़ते हैं (— जिन्हें हमारा एकशिव-सिद्धान्त टाल देता है)।