The Vision of Śiva· 6.113 / 126

The Vision of Śiva6.113

6.113
निजं तस्य न हीयेत तद्वत् परमकारणे । यदि तत्तर्हि मोक्षेऽपि विशेषः किं निवार्यते ॥११३॥
nijaṃ tasya na hīyeta tadvat paramakāraṇe | yadi tattarhi mokṣe'pi viśeṣaḥ kiṃ nivāryate
— निज (स्वरूप) ; — उस (राजा) का ; — हीन नहीं होता ; — उसी प्रकार ; — परमकारण (शिव) में ; — यदि वह ; — तो ; — मोक्ष में भी ; — विशेष (भेद) ; — क्यों निवारित किया जाता है?

उस (राजा) का निज (स्वकीय राजस्वरूप राज्य करने से) हीन नहीं होता; उसी प्रकार परमकारण (शिव) में (भी)। यदि वह (स्वीकृत हो) — तो मोक्ष में भी (शिव और मुक्त के बीच) विशेष (भेद) क्यों निवारित किया जाता है (— एकशिव-मत में वह विलीन हो जाता है)?