The Vision of Śiva· 6.112 / 126

The Vision of Śiva6.112

6.112
तदप्यस्ति कर्तृता चेत्तेषां तत्तादृशं न किम् । अथ राज्ञो यथा राज्यकर्म विदधतः सुखम् ॥११२॥
tadapyasti kartṛtā cetteṣāṃ tattādṛśaṃ na kim | atha rājño yathā rājyakarma vidadhataḥ sukham
— वह भी (शिव में) है ; — कर्तृता ; — यदि (आप कहें) ; — उन (मुक्तों) की ; — वह, वैसी ; — क्यों नहीं? ; — अब ; — राजा का ; — जैसे ; — राज्य-कर्म ; — सम्पादन करने वाले (राजा) का ; — सुख के साथ

यदि (आप कहें) वह कर्तृता (कर्तापन) भी (शिव में) है — तो उन (मुक्तों) की वैसी (कर्तृता) उसी प्रकार की (तथा समानरूप से अनायास) क्यों नहीं? अब, जैसे राज्य-कर्म का सम्पादन करने वाले राजा को (केवल) सुख (होता है — श्रम नहीं)।