The Vision of Śiva· 6.115 / 126

The Vision of Śiva6.115

6.115
तस्मादेकशिवत्वेऽत्र स्थिते नैकस्य बन्धता । मोक्षता चोपपद्येत निर्मलं समलं तथा ॥११५॥
tasmādekaśivatve'tra sthite naikasya bandhatā | mokṣatā copapadyeta nirmalaṃ samalaṃ tathā
— इसलिए ; — शिव के एकत्व के ; — यहाँ ; — सिद्ध होने पर ; — नहीं एक की ; — बन्धता ; — और मोक्षता ; — उपपन्न होगी ; — निर्मल ; — और समल उसी प्रकार

इसलिए, जब यहाँ शिव का एकत्व सिद्ध हो जाता है, तब उस एक (शिव) की बन्धता और मोक्षता उपपन्न नहीं हो सकती — (न ही उसका) निर्मल और समल (मलयुक्त) होना (— क्योंकि ये दृष्टिकोण के हैं, एक परम तत्त्व के नहीं)।