तस्मादेकशिवत्वेऽत्र स्थिते नैकस्य बन्धता ।
मोक्षता चोपपद्येत निर्मलं समलं तथा ॥११५॥
tasmādekaśivatve'tra sthite naikasya bandhatā |
mokṣatā copapadyeta nirmalaṃ samalaṃ tathā
इसलिए, जब यहाँ शिव का एकत्व सिद्ध हो जाता है, तब उस एक (शिव) की बन्धता और मोक्षता उपपन्न नहीं हो सकती — (न ही उसका) निर्मल और समल (मलयुक्त) होना (— क्योंकि ये दृष्टिकोण के हैं, एक परम तत्त्व के नहीं)।