The Vision of Śiva· 6.107 / 126

The Vision of Śiva6.107

6.107
तथा पञ्चविधेकृत्ये नानात्वादक्रिया भवेत् । यानन्यसदृशी भूमिः सा परा प्रान्तभूमिका ॥१०७॥
tathā pañcavidhekṛtye nānātvādakriyā bhavet | yānanyasadṛśī bhūmiḥ sā parā prāntabhūmikā
— इसी प्रकार ; — पंचविध कृत्य में ; — नानात्व के कारण ; — अक्रिया (गतिरोध) ; — उत्पन्न हो जाएगी ; — जो अनन्यसदृशी ; — भूमि (अवस्था) ; — वही परा ; — प्रान्तभूमिका (चरम तल)

इसी प्रकार, पंचविध कृत्य (सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोधान, अनुग्रह) में नानात्व (अनेक कर्ताओं) के कारण अक्रिया (गतिरोध) उत्पन्न हो जाएगी। जो भूमि (अवस्था) अनन्यसदृशी (किसी अन्य के समान नहीं) है, वही परा (सर्वोच्च) प्रान्तभूमिका (चरम तल) है।