तथा पञ्चविधेकृत्ये नानात्वादक्रिया भवेत् ।
यानन्यसदृशी भूमिः सा परा प्रान्तभूमिका ॥१०७॥
tathā pañcavidhekṛtye nānātvādakriyā bhavet |
yānanyasadṛśī bhūmiḥ sā parā prāntabhūmikā
इसी प्रकार, पंचविध कृत्य (सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोधान, अनुग्रह) में नानात्व (अनेक कर्ताओं) के कारण अक्रिया (गतिरोध) उत्पन्न हो जाएगी। जो भूमि (अवस्था) अनन्यसदृशी (किसी अन्य के समान नहीं) है, वही परा (सर्वोच्च) प्रान्तभूमिका (चरम तल) है।