The Vision of Śiva· 6.106 / 126

The Vision of Śiva6.106

6.106
तस्याधिकमहेशित्वे मोक्षे न्यूनाधिके स्थितिः । बहूनां नायकत्वेऽपि नायकत्वं विहन्यते ॥१०६॥
tasyādhikamaheśitve mokṣe nyūnādhike sthitiḥ | bahūnāṃ nāyakatve'pi nāyakatvaṃ vihanyate
— उसका (एक शिव का) ; — अधिक महेशित्व होने पर ; — मोक्ष में ; — न्यून-अधिक की ; — स्थिति ; — बहुतों का ; — नायकत्व होने पर भी ; — नायकत्व ; — विहत (खण्डित) होता है

यदि उनमें से (एक) का अधिक महेशित्व (श्रेष्ठ स्वामित्व) हो, तो मोक्ष में न्यून-अधिक (की तरतमता) की स्थिति (बन जाएगी); और बहुतों के नायकत्व (स्वामित्व) होने पर भी (प्रत्येक का) नायकत्व विहत (खण्डित) हो जाता है (— अतः बहुत्व का मत असंगत है)।