The Vision of Śiva· 5.98 / 110

The Vision of Śiva5.98

5.98
स्वशक्त्या घनरूपत्वे शिव आस्ते क्वचित्तथा । स्थितं सर्वममूर्तत्वे सर्वेषां समता स्फुटा ॥९८॥
svaśaktyā ghanarūpatve śiva āste kvacittathā | sthitaṃ sarvamamūrtatve sarveṣāṃ samatā sphuṭā
— अपनी शक्ति से ; — घन-रूप (ठोस-रूप) में ; — शिव ; — स्थित रहता है ; — कहीं ; — इस प्रकार ; — स्थित ; — सब कुछ ; — अमूर्तता में ; — सबकी ; — समता ; — स्पष्ट

अपनी शक्ति से, घन-रूप (ठोस-रूप) में, शिव कहीं इस प्रकार स्थित रहता है; (फिर भी) सब कुछ (अपनी अन्तर्निहित) अमूर्तता में स्थित है — और सबकी समता स्पष्ट है।