The Vision of Śiva· 5.95 / 110

The Vision of Śiva5.95

5.95
कार्यस्य नाशे तत्कार्यकार्ये तत्कार्यनाशिता । क्षणलक्षाणि जायन्ते क्रमात्तत्तद्विनाशतः ॥९५॥
kāryasya nāśe tatkāryakārye tatkāryanāśitā | kṣaṇalakṣāṇi jāyante kramāttattadvināśataḥ
— कार्य के नाश में ; — उस कार्य के कार्य की ; — उस-कार्य-नाशिता ; — लाखों क्षण ; — उत्पन्न होते हैं ; — क्रम से ; — उस-उस के विनाश से

(क्षणिकवादी के मत में) कार्य के नाश में, उस कार्य के कार्य की उस-कार्य-नाशिता (होती है); (इस प्रकार) क्रम से उस-उस के विनाश से लाखों क्षण उत्पन्न होते हैं (— इस मत का अब हम खण्डन करते हैं)।