अग्रकव्यवधानादेरथ चेत्कार्यनाशिता ।
पदार्थवित्प्रक्रियया प्रक्रिया प्रक्रियैव सा ॥९४॥
agrakavyavadhānāderatha cetkāryanāśitā |
padārthavitprakriyayā prakriyā prakriyaiva sā
अथवा यदि (कहो कि) सामने व्यवधान (आड़) आदि से (प्रत्यक्ष-) कार्य का नाश (हो जाता है) — (तो हम कहते हैं) पदार्थ-वेत्ता (चित्) की प्रक्रिया से वह प्रक्रिया प्रक्रिया-मात्र ही है (अभिव्यक्ति का प्रकार, वास्तविक विनाश नहीं)।